किन्नरों की ज़िन्दगी के संघर्षों को दिखाता नाटक मंगलमुखी


किन्नर, इंसानों का तीसरा जेंडर। हिजड़ा, छक्का जैसे शब्दों से अपमानित किये जाने वाले हम आप जैसे सामान्य लोग। हम सभी ने कहीं न कहीं देखा है इनको, अधिकतर बार ट्रेनों में, सिग्नल पर माँगते हुए या रेड लाइट एरिया में सेक्स वर्कर के रूप में। एक पुरे जेंडर से हमारा साक्षात्कार महज इन्ही जगहों और इन्ही परिस्थितियों में हुआ है। इस वजह से हम इस पुरे समुदाय के बारे में कुछ ख़ास जानते नहीं और हमारी ये अज्ञानता जब हमारे संकीर्ण दृष्टिकोण और समाज के दोहरे मापदंडों से मिल जाता है तो हमारा किन्नरों के प्रति एक घृणा और तिरस्कार भरा नजरिया जन्म लेता है। इस पुरे समुदाय के प्रति लोग कई तरह की गलतफहमियों और पूर्वाग्रहों से ग्रसित होते हैं। इसकी एक बड़ी वजह है किन्नरों की दुनिया से और उनके संघर्ष से हमारा अपरिचित होना। इसी असलियत को बदलने और किन्नरों की ज़िन्दगी और उनकी अपने अस्तित्व के लिए लड़ाई को रंगमंच के ज़रिये हम तक पहुँचाने की एक नायाब कोशिश है ये solo नाटक “मंगलमुखी”।

मंगलमुखी” कहानी है उन लाखों किन्नरों की ज़िन्दगी की जिन्हें हमारे समाज में एक दोयम दर्जे का इंसान समझा जाता रहा है। ये नाटक हमें एक झरोखा प्रदान करता है उनकी व्यक्तिगत ज़िन्दगी में झाँकने का। उन्हें अपने जीवन में किन किन कठिनाइयों का सामना करना होता है, किस तरह की मानसिक और शारीरिक बदलाव से हो के गुज़रना पड़ता है और इस समाज में रहने के लिए उन्हें कितना अपमान सहना होता है और कितने समझौते करने पड़ते हैं ये सब आपको इस नाटक के माध्यम से पता चलेगा।

“मंगलमुखी” एक किन्नर के ज़िन्दगी के विभिन्न पड़ावों और उसका ख़ुद के अस्तित्व और ख़ुद की सेक्सुअलिटी के बारे में उसके अनुभवों को दर्शाता है। ये नाटक असल ज़िन्दगी के उन पहलुओं पे रौशनी डालता है जो इंसान के बनने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस नाटक के ज़रिये किन्नर समुदाय के सामाजिक एवं आर्थिक हालातों पर भी बात की जाती है और इस समस्या के तरफ लोगों का ध्यान खींचा जाता है कि किन्नर समुदाय की परिस्थिति उन्हें किस तरह से बेचारा और असहाय बना के छोड़ती है। मंगलमुखी किन्नरों के तत्कालीन हालातों पे एक सवालिया निशान उठाता है और साथ ही ये कोशिश भी करता है कि लोगों में किन्नरों के प्रति जो अज्ञानता और भ्रांतियाँ फैली है उसका जवाब दे सके।

मंगलमुखी नाटक का मुख्य उद्देश्य लोगों में किन्नरों के प्रति संवेदना और उन्हें इस समाज का ज़रूरी हिस्सा मान के अपनाने की भावना पैदा करना है। इसकी कोशिश है कि लोग किन्नरों की ज़िन्दगी में आने वाले उतार-चढ़ाव, समाज के द्वारा ठुकराए जाने पर उनकी निराशा, और अपने अस्तित्व के लिए उनके संघर्ष को देख पाएं और उसे समझ पाएं। मंगलमुखी का विषय ऐसा है जो कि किसी क्षेत्र, राज्य, देश तक ही बंधा हुआ नहीं है। बल्कि ये एक मानवीय संवेदना से जुड़ा है जिस से ये हम-आप सभी से जुड़ा हुआ है।

मंगलमुखी का निर्देशन कर रहे हैं एक युवा लेखक और कलाकार अभिषेक चौहान जो पहले भी कई NGO के नाटकों की प्रस्तुति से लेखक के तौर पे जुड़े रहे हैं। मंगलमुखी उनका निर्देशक के रूप में पहला नाटक है। इस सोलो नाटक के नायक हैं युवराज कुमार जिन्होंने राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फिल्म “मिथिला माखन” में अपने अभिनय से सबको बहुत प्रभावित किया है। इसके अलावा युवराज कई नाटकों, शार्ट फिल्मों और विज्ञापनों में काम कर चुके है। थिएटर और अभिनय में डिप्लोमा किये युवराज का मंगलमुखी के अपने किरदार के बारे में कहना है कि

“मेरा ये मानना है कि एक किन्नर का रोल करना मुझे एक अवसर देता है कि मैं लोगों को किन्नरों के बाहरी और आंतरिक समस्याओं से अवगत करा सकूँ इसके साथ ही लोगों में इस पुरे समुदाय के प्रति एक संवेदना पैदा करने की कोशिश कर सकूँ”

मंगलमुखी का मंचन मंगलवार, 7 नवम्बर को शाम 6:00 बजे से कालीदास रंगालय में किया जायेगा। इस नाटक को पुखराज फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक किन्नरों की समस्याओं को पहुँचाया जा सके इसलिए इस नाटक को देखने के लिए एंट्री मुफ्त है। इसके अलावा बिहार से अपने अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने के लिए RJ श्रुति, मधुबनी आर्टिस्ट रिचा राजपूत, “ओ वुमनिया” फेम गायिका रेखा झा और इंडिपेंडेंट फ़िल्मकार प्रशांत जौहरी को सम्मानित किये जाने का समारोह भी आयोजित किया जायेगा। नाटक के आयोजकों के द्वारा एक क्राउड फंडिंग का कैंपेन भी चलाया जा रहा है जिस से जमा होने वाली राशि किन्नरों के बच्चों को उनकी मदद हेतु दी जाएगी। मंगलमुखी के मंचन के पीछे बहुत ही नेक इरादें हैं इसलिए बड़ी से बड़ी संख्यां में इसे देखने आएं और इस नाटक का मंचन सफल बनाएं।
किन्नरों के जीवन को नजदीक से जानने के लिए इस नाटक को देखा जाना और इस नेक इरादे को अमली जामा पहनाने वाले कलाकारों का हौसला बढ़ाना बहुत ज़रूरी है। तमाम क्षेत्रों में किन्नरों ने ये साबित किया है कि वो कहीं से भी मर्दों या औरतों से कम काबिलियत नहीं रखते हैं। ऐसे में ज़रूरत है कि हम ऐसी किसी भी कोशिश को जो इस समुदाय की समस्याओं की तस्वीर पेश करती है, उसे अपना पूरा सहयोग दें।

क्राउड फंडिंग में अपना सहयोग देने के लिए आप अपनी तरफ से आर्थिक योगदान Paytm या बैंक डिपाजिट के द्वारा दे सकते हैं

PayTm no : 9334024985
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Photo credit: PatnaBeats

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