बचपन की यादों को संजोता ‘कहानी घर’ |

 

कहते हैं बचपन का पल सुनहरे पल जैसा होता है. जिंदगी के इस खूबसूरत पल को हर कोई संजोना चाहता है. इस धरती पर हर प्राणी को इस अनूठे पल को भरपूर जीने का अधिकार है. बचपन को बिना किसी बने बनाये सांचे के ढलने की छूट है.हर बच्चे को जनम से ही एक  नाम और एक राष्ट्रीयता का अधिकार है. जन्म से ही वह एक अधिकार का हकदार होता है.वह है बचपन का अधिकार.बचपन भी अपने आपमें एक अधिकार है. किसी भी मौलिक अधिकार की तरह बचपन व्यतीत करने , प्रयोग और प्रयास करने का मौका होना ही चाहिए. क्योंकि बचपन कभी वापस नहीं लौटता है.हम अपने और समाज के लिए तो बहुत कुछ कर रहे हैं पर कभी हमने सोचा है कि बचपन के लिए हमने क्या किया ? क्या बचपन संरक्षित है ? क्या बचपन को संरक्षित करना हमारा उत्तरदायित्व नहीं है?

जी हां, इन सब बातों के साथ ही बचपन की यादों को संजोने के ​एक अध्याय की शुरुआत की है पटना शहर में “कहानी घर” ने. इस अधयाय की शुरुआत गत 21 मई को पटना के राजेंद्र नगर के रोड न -6 में  चित्रकार मीनाक्षी झा एवं डिज़ाइनर थिंकर रोनी ने की . वैसे तो “कहानी घर” के  सफर की शुरुआत  2014 से ही हुई थी. पर इस सफर की रेल में अब जाकर कई कहानी रूपी यात्री चढ़े हैं. यह रेल अब बड़े जंक्शन पर आ चुकी है . जहां  कहानी का हर यात्री “कहानी घर” के  सफर में आमंत्रित है .


कहानी घर कहानी सुनने ,बोलने, लिखने ,पढ़ने ,देखने  व समझने-समझाने  वालों का घर है .जहां बचपन से पचपन तक के लोगों  को अपने बचपन के अनूठे पलों को कहानी द्वारा साझा करने का भरपूर मौका मिलता है.इस मशीनी युग में धीरे—धीरे हम नानी —दादी की कहानियां को भूलते जा रहे हैं . बचपन को  मोबाइल और  इंटरनेट के सहारे छोड  चुके हैं . ज़रा सो​चिए यह कितना कठिन अनुभव है.

“कहानी घर ” के नये सफर का साक्षी बने वरिष्ठ पत्रकार एवं जगजीवन  राम शोध संसथान के डायरेक्टर  श्रीकांत  ,फिल्म क्रिटिक विनोद अनुपम ,प्रो विनयकंठ और कई कलाकार.  श्रीकांत ने शुभकामनाओं के साथ “कहानी घर ” के सफर को समाज के वंचित तबको के बीच ले जाने की बात कही.प्रो विनयकंठ ने इसे सरकारी स्कूलों और गरीब बच्चों के बीच ले जाने पर ज़ोर  दिया.


वहीं  दूसरी तरफ़ कहानी घर की ओर से प्रत्युष पराशर द्वारा संकलित ‘101 बिहारी’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया | इस छोटे से प्रकाशन का मुख्य उद्देश्य  अक्रमत: ऐसे ‘101 बिहारियों’ पर जानकारी संकलित  है, जिन्होंने बिहार को गौरांवित किया है |
एक प्रकार से यह पुस्तक लोगों को , निश्चित रूप से, प्रेरित करेगी कि वे सांस्कृतिक ध्रुविकरण एवं रूढीवादिता से लड़ें ताकि विभिन्न संस्कृतियों के बीच आपसी समझ एवं सहयोग की भावना का विकास हो सके|

प्राचीन एवं पारंपरिक भारत में, बिहार को सत्ता, ज्ञान एवं संस्कृति का केंद्र माना जाता रहा है. मगध से भारत के पहले साम्राज्य – मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ. इसी मगध साम्राज्य ने, मौर्य और गुप्त वंश के नेतृत्व में, दक्षिण एशिया के वृहत भूभाग को एक साथ जोड़कर एक केंद्रीय शासन के अधीन लाया ये भारतवर्ष के वर्तमान स्वरूप की बुनियाद बना और इसी मगध की पावन भूमि से विश्व के सर्वाधिक अनुगमित धर्म- बौद्ध धर्म का विकास हुआ. इसके अलावा कर्ण, आर्यभट्ट लेकर सुशांत सिंह राजपूत जैसी बिहार विभूतियों को भी शामिल किया है.

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