गुटर-गुटरगूं सम्पूर्ण रूप से बिहार का सिनेमा है | अभिनेत्री अस्मिता शर्मा


मेरी माँ जो मंझौल (बेगुसराय) की हैं | उन्होंने एक बार बातों ही बातों में जिक्र किया था कि उनके गाँव में महिलायें श्रृंगारिक रूप से तैयार हो कर गाँव से बाहर खेतों या बगीचों में शौच जाती थी | कमोबेश  बदस्तूर यह आज भी जारी है | समाज के इस दोहरे सोंच और समझ पर मुझे रोष हुआ | लिहाजा गौर करने पर यह स्पष्ट दिखा कि शायद महिलाओं को मनुष्य माना ही नहीं जाता | भले ही इस गंभीर मुद्दे पर आज हम सभी बात कर रहे हैं लेकिन इस समस्या का जड़ सदियों पुराना है | उक्त बातें बिहार सरकार के कैबिनेट द्वारा कर-मुक्त किये फीचर फिल्म गुटर-गुटरगूं  की मुख्य अभिनेत्री अस्मिता शर्मा मॉरिसन भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बोल रही थी | अभिनेत्री शर्मा ने यह कहा कि इस मुद्दे को लेकर संदेशात्मक होने के साथ साथ मनोरंजक फीचर फिल्म बनाना मेरे लिए बहुत ही चुनौती पूर्ण था | संभवतः महिलाओं के लिए शौच समस्या पर पहली बार कोई फीचर फि

ल्म बनी है | यही कारण है कि बिहार सरकार ने इस फिल्म को कर-मुक्त किया है | मुझ जैसे नए फिल्मकार को प्रोत्साहित करने के लिए मैं बिहार सरकार के प्रति कृतज्ञता प्रकट करती हूँ | कहा जा सकता है कि गुटर-गुटरगूं सम्पूर्ण रूप से बिहार का सिनेमा है | इस फिल्म में अभिनय करने वाले अधिकांश कलाकार पटना रंगमच के हैं | इसकी पुरी शूटिंग जहानाबाद के पंडुई गाँव में हुई है, जो मेरा पैतृक गाँव है  | मैं खुद पटना रंगमच की हिस्सा रही हूँ | फिल्म के निर्देशक प्रतीक ने मुझ पर भरोसा करते हुए दो तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी | जिसके तहत इस फिल्म का कथा, पटकथा से लेकर संवाद लेखन भी मैंने किया | निर्माता के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली |

वहीँ बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक गंगा कुमार ने कहा कि मैं इस  फिल्म के तमाम कलाकारों एवं तकनीशियनों को बधाई देता हूँ | इस फिल्म की ख़ास बात यह है कि यह एक ऐसे समस्या की बात करती है, जिसको लेकर सरकार भी गंभीर है | लोगों में जागरूकता जगाने में यह फिल्म सहायक सिद्ध होगी, ऐसा मैं उम्मीद करता हूँ | बिहार सरकार ने इसे टैक्स फ्री किया है, ताकि अधिक अधिक लोग इसे आसन दर इस फिल्म का अवलोकन कर सकें | फिल्म निगम ऐसे फिल्मकारों का हमेशा स्वागत करने को तैयार है, जो बिहार की पृष्ठभूमि, बिहार की समस्या समाधान या बिहार की गौरवशाली अतीत को अपने फिल्मों के माध्यम से सामने लाने का काम करेंगे |

गुटर-गुटरगूं के निर्देशक प्रतीक शर्मा ने कहा कि जब बात शौच की हो रही होती है, तब बात की भी पुरी संभावना रहती है कि कहीं ये फूहड़ता के पटरी पर न चला जाय | उसमें भी आपकी कथा अगर महिलाएं के माध्यम से कहे जाने हैं, तब उस डर की संभावना और भी प्रबल हो जाती है | एक निर्देशक के नाते इन बातों को दिमाग में गांठ बाँध कर सकारात्मकता दिशा देना,  चुनौतीपूर्ण रही | हमने महिलाओं के केवल समस्या को माध्यम ज़रूर बनाया है, लेकिन फिल्म उनके अस्तित्व और गरिमा से जुडी कई समस्यों के संकेत देते हैं | मेरा टैग लाईन है “इट्स नोट अ वुमन इशू, इट्स अ ह्यूमन इशू’ |

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए रीजेंट सिनेमा हॉल के मालिक सुमन सिन्हा ने कहा कि मैं गुटर-गुटरगूं की पुरी हार्दिकता से प्रशंसा करता हूँ | यह फिल्म न केवल बिहार में तो बनी ही, सबसे बड़ी बात तकनिकी रूप से भी काफी समझदार और समृद्ध  फिल्म है |  श्री सिन्हा ने यह कहा कि मैंने स्वयं आगे बढ़ कर इस फिल्म को रीजेंट में लगाने की बात की | मुझे लगता है इस फिल्म देश के सभी नागरिकों को देखना चाहिए | मैंने जब इस फिल्म पहली बार देखा था तो बीस मिनट तक कुर्सी से उठ नहीं पाया था | इसने मुझे इतना गहरा प्रभाव डाला | बहुत दिनों बाद मैंने एक सम्पूर्ण सिनेमा देखा था, हालाँकि सुनने में बड़ा अजीब लगेगा क्यूँ की मैं सिनेमा घर चलाता हूँ | लेकिन यह सच है |

मौके पर फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम ने कहा कि यह फिल्म इस दृष्टि से भी बिहार के परिपेक्ष में महत्वपूर्ण हो जाता है कि यह विषय अछूता रहा है | कार्यक्रम का संचालन युवा फिल्मकार रविराज पटेल ने किया |

यहाँ देखिये फिल्म गुटर-गुटरगूं का कुछ अंश

 

 

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