गुंचा सनोबर | बिहार की पहली मुस्लिम महिला आईपीएस बनने जा रही हैं।

बिहार के बाढ़ जिला में जन्मी गुंचा सनोबर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में सफलता हासिल की है। 2014 के सिविल सेवा परीक्षा में बिहार की गुंचा सनोबर को 424 वां रैंक मिला है। उन्होंने लाखों मुस्लिम लड़कियों के लिए एक नई राह दिखाई है। गौरतलब है कि मुसलमानों में शिक्षा की दर समाज के अन्य वर्गों की अपेक्षा कम है, ऐसे में सनोबर की सफलता एक मिसाल है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पटना के Notre Dame Academy में हुई। इसके बाद Dayananda Sagar College of Engineering में इलेक्ट्रॉनिक से इंजीनियरिंग की।  उन्होंने यह सफलता दूसरी कोशिश में हासिल की। उनके मां व पिता दोनों बिहार के ही पश्चिम चंपारण के बेतिया शहर के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। पिता अनवर हुसैन 2007 से 2009 तक पटना के सिटी एसपी रहे। इसी साल जनवरी में ही दरभंगा से डीआईजी पद से रिटायर हुए। सनोबर के परिवार में मां के अलावा तीन बहने भी हैं। बड़ी बहन खूशबू यास्मीन दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (डीएमसीएच) से पीजी कर रही है और छोटी बहन जेबा परवीन भी मेडिकल की ही पढ़ाई कर रही है।

 

सनोबर का कहना है कि पुलिस व जेल रिफार्म बहुत ज़रूरी है। न्यायपालिका के सिस्टम में भी सुधार भी जरूरी है। गरीबों को न्याय के लिए इंतज़ार करना पड़ता है। सनोबर कहती हैं कि हमारे देश की सरकार भी इसके लिए दोषी है। सुप्रीम कोर्ट पुलिस व जेल रिफार्म दोनों पर कई दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है, पर हमारी सरकारें इसको लागू नहीं कर रही हैं। सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी व अकाउंटेबेलिटी होना चाहिए। मैं जहां भी रहूंगी, पूरी कोशिश होगी कि लोगों को आरटीआई लगाने की ज़रूरत ही न पड़े, क्योंकि इस कानून में ही प्रावधान है कि अधिक से अधिक जानकारी ऑनलाइन कर दी जाए, ताकि लोगों को सूचना मांगने की जरूरत ही न पड़े।

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