बिहार से निकली जेन-x लव स्टोरी – गंदी बात की अच्छी बातें!

गन्दी बात राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित २4 वर्षीय युवा लेखक क्षितिज रॉय ने लिखा है! २०१७ जनवरी में प्रकाशित इस किताब में आपको एक हीरो जैसा लड़का गोल्डन मिलेगा, DU के स्वैग वाली लड़की मिलेगी, कुछ शहर मिलेंगे, शहर में बहने वाली नदियाँ मिलेंगी, नदियों के किनारे बुने कुछ सपने होंगे और वो सपने पूरे होंगे या नही यही गन्दी बात और इसके पात्रों की यात्रा है! ये उपन्यास चिट्ठियों की शक्ल में है और दूसरों की चिठियाँ पढ़ पाने का सुख कितना होता है ये हम सब जानते हैं!

किताब का नाम गंदी बात है तो जाहिर है इसमें वो सारी गन्दी बातें होंगी, जो हमे न करने की हिदायतें और सलाहें भर भर, फुल डोज़ में घर समाज से हर दिन मिलती हैं! इन गंदी बातों की सबसे गन्दी बात उनका बेपरवाह इश्क है! स्कूल के टेम पर होने वला इश्क! पढने लिखने वाली- फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती डेज़ी को देसी से गोल्डन से होने वाला इश्क! इश्क जो गंगा के उस पार केले के खेतों में जा कर छिपता है, मुंह पर बंधे दुपट्टे में जवान होता है और बाइक की स्पीड कर  तरह पटना शहर में बस सिर पर चढ़ते जाता है! प्यार में पटना कैसा दिखता और महसूस होता है, ये गंदी बात बड़े प्यार से बताती और याद दिलाती है!

दिल्ली की ट्रेन में टीटी से दोस्ती कर अपनी महबूबा से मिलने साउथ दिल्ली में देश के टॉप गर्ल्स कॉलेज के आगे बिंदास बग्घी पे सवार गोल्डन अपनी डेज़ी का शाहरुख़ बनना चाहता है! गोल्डन लापरवाह है, बेफिक्र है, उसके लिए डेज़ी और डेज़ी का प्यार उसकी दुनिया है! डेज़ी प्यार में जब समझदार होती है, जब प्यार के अलावा और भी बहुत करने के सपने देखने लग जाती है ,तब शायद ये उनकी जिंदगी की दूसरी सबसे गन्दी बात हो जाती है!

हिंदी के मेनस्ट्रीम उपन्यासों में शायद पहली बार रोमांस को हमारी आपकी भाषा में लिखा गया है! दिल्ली में यमुना के किनारे का दृश्य वहां उनकी ‘गन्दी-बातों’ को लेखक ने जिस तरह अभिव्यक्त किया है, वो इंटेंसिटी और खुलापन आपको शायद ही हालिया किसी भी अन्य उपन्यास में मिले१ इसका कारण ये भी है की लेखक 42 नहीं 24 साल के युवा हैं जिन्होंने अपने उपन्यास को किसी भी तौर पर  जबरदस्ती बाँधने की कोशिश नहीं की!

उपन्यास के अन्य किरदारों घटनाओं में काल्पनिकता है पर आपको उनमे से शायद ही कोई ऐसा मिले जिसे आपने अपने इर्द गिर्द पहले देखा या पाया ना हो! दिल्ली में बिहार का वो ऑटो वाला, उसका रंग बिरंगा भाई के पोस्टरों से सजा धजा ऑटो हो या फिर दिल्ली पहली बार वो भी अकेले आने पर होने वाली धुक धुकी! सब भुगता हुआ, झेला हुआ सा लगता है और शायद यही इस उपन्यास की सबसे बाँध कर रखने वाली बात है!

उपन्यास अपने चरम पर तब पहुँचता है जब दो गैर राजनैतिक, सिर्फ प्यार करने वाले युवा दिल्ली के चुनावी मौसम में न चाहकर ही फंस जाते हैं! ऊपर से देश की राजधानी में क्रांति सा नज़र आने वाला २०१३ का ये चुनाव कितनी परतों में बदलाव ला रहा होता है ये लेखक ने बेहतरीन संतुलन के साथ स्थापित किया है! २०१३ की चुनावी आंधी में, केजरीवाल के वादों और आम आदमी की बातों, हालातों से फीकी पड़ती प्यार की चाशनी में डूबते उतराते गोल्डन और डेज़ी साथ कितनी दूर जायेंगे,गन्दी बात इन्ही सवालों का जवाब है!

This sweet story by Kshitij Roy will make you nostalgic about Patna.

Posted by PatnaBeats on Friday, May 4, 2018

इसीलिए ये उपन्यास आपको तीन कारणों से पढना चाहिये- १) अगर आपने कभी किसी से प्यार किया है. २) अगर आप अभी किसी के प्यार में हैं ३) अगर आप बिहार से दूर आज भी बिहार को दिल में ले कर घूमते हैं!

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Quote of the day: “Only the very weak-minded refuse to be influenced by literature and poetry.” 
― Cassandra Clare, Clockwork Angel

 

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