‘एक कविता बिहार से’ में पेश है गीतकार एवं कवि राज शेखर की कविता

राज शेखर हिंदी फिल्म जगत के जानें – मानें गीतकार हैं। राज शेखरबॉलीवुड की कई फिल्मों के गानों में शब्दों का जादू बिखेर चुके है। बिहार के मधेपुरा में जन्में राज शेखर गानों के साथ- साथ कविताएं भी लिखते है। तनु वेड्स मनु सीरीज़ की दोनों फिल्मों में राज जी के लिखे हुए गानें बेहद पसंद किये गए । पिताजी चाहते थे की राज शेखर इंजीनियर बनें मगर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज (केएमसी) से हिंदी साहित्य में बीए और फिर एमए किया। केएमसी की नाट्य संस्था “द प्लेयर्स” से बतौर अभिनेता और निर्देशक बनकर इनका कला जगत में आगमन हुआ । दिल्ली के एनडीटीवी से पत्रकारिता करने के बाद वे मुंबई आये। फिल्मों में छोटे रोल करते हुए गानें लिखने लगे, वहां से लिखने का दौर शुरू हुआ ।


बिहार के गांव और यहां की माटी की महक बाहर रहने वालें बिहारवासियों को समय – समय पर याद आती है। राज शेखर 2004 से मुंबई में बसें हुए है। लेकिन आज भी कोसी के कछार की धूल-धक्कड़ उन्हें याद आते है। उन्हीं यादों को राज शेखर ने कविता के रूप में सजाया है। आज ‘एक कविता बिहार से‘ में पढ़ते है राज शेखर की लिखी हुई कविता

 

प्रेम, बारिश और इंक़लाब

पता है मुझे
कविता से
कमसकम मेरी कविता से
न निज़ाम बदलता है,
न प्रेमिका मानती है
और न ही बादल आते हैं..
बहेलिया नहीं बदलता अपना मन
कुल्हाड़े लिए हाथ नहीं रुकते
कोई इंक़िलाब कहां आ पाता है कविताओं से
फिर भी
ख़ुद को ज़िंदा दिखने के लिए
लिखता हूं कुछ
क्या पता
अगर ज़िंदा रह गया तो
प्रेम, बारिश और इंक़लाब
सब आ जाए किसी दिन.


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