हे अम्बिके, सुनु प्रार्थना, जगदम्बिके, सुनु प्रार्थना | एक कविता बिहार से

दुर्गा पूजा के शुभ मौके पर माँ दुर्गा की प्रार्थना में एक कविता प्रस्तुत है| कविता की भाषा मैथिलि है तथा कवि हैं पंडित श्री भोला झा ‘विमल’ जी| ‘विमल’ जी बिहार के मधुबनी जिला के चिकना नामक ग्राम से हैं| संस्कृत से आचार्य की उपाधि से विभूषित इस कवि की आज की कविता माँ का वंदन करती है|
प्रस्तुत है पटनाबीट्स की तरफ से एक कविता बिहार से में, प्रेषक अमित शांडिल्य की मदद से, संस्कृताचार्य भोला झा ‘विमल’ जी की कविता, जिसका शीर्षक है- ‘प्रार्थना’|

प्रार्थना

हे अम्बिके, सुनु प्रार्थना, जगदम्बिके, सुनु प्रार्थना |
नहि अर्चना-पद-वंदना नहि-साधना-शुभ-चिन्तना ||
हे अम्बिके…
हम छी विकल त्रय-ताप सँ, भव-रोग-भय-संताप सँ,
जीवन वितेलों पाप से, पेलों कतहु नही सान्तवना||
हे अम्बिके…
झूठे सुखक मन-आश में, मृग दौड़ी रहल पियास में,
धिक्कार व्यर्थ-प्रयास में, वेहाल-व्यस्त-विडंबना||
हे अम्बिके…
नहि योग-जप-नहि ध्यान अछि, पूजा-तपक नहि ज्ञान अछि,
नहि दान किछु, अभिमान में दिन राति पावी यातना||
हे अम्बिके…
जय मंगले, मंगल करू, हिय-पद्म-पद-पंकज धरु,
दुख में रही, सुखमे रही, गावी विमल-पद वंदना||
हे अम्बिके…

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