डॉक्टर हाथी के नाम से मशहूर बिहारी एक्टर कवि कुमार आज़ाद की हंसी से महरूम हो गया टेलीविज़न जगत

कभी कभी कुछ लोग, कुछ चीज़ें, कुछ जगहें जान से इतनी ज़्यादा जुड़ जाती हैं उनके जाने का एहसास भी बड़ी मुश्किल से होता है। एक पल को लगता है जैसे सब झूठ है, फ़रेब है, जैसे अभी वह चीज़ वापस जायेगी, जैसे अभी वह उठ खड़ा होगा और गले लग जाएगा, जैसे वो स्टेशन जो पीछे छूट गया है अगले हाल्ट पर फिर दुबारा ट्रेन वहीं रुक जाएगी। फिर कुछ बहुत यक़ीं होता है और यथार्थ से रूबरू होना पड़ता है कि वो जो था, बीत गया।  फिर धीरे धीरे ठहर चुकी ज़िन्दगी दुबारा अपने आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पहियों पर सरकने लगती है। 

ऐसा ही कुछ वाक़या कल दोपहर हुआ, जब ख़बर मिली की कवि कुमार आज़ाद का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वही कवि कुमार आज़ाद जिनको हम तक़रीबन पिछले 8 सालों से डॉक्टर हंसराज हाथी के नाम से जानते थे। सब टीवी के अतिलोकप्रिय शोतारक मेहता का उल्टा चश्माके हर एक किरदार से जैसे लगाव सा हो गया था। साढ़े आठ बजे लगता था जैसे अपने सोसाइटी की बातें चल रहीं हैं, जेठालाल, भिड़े, मेहता साब या पोपटलाल, सब अपने ही मोहल्ले के लगते थे। वैसे ही थे डॉक्टर हंसराज हाथी। देखने से ही उनके खाने पीने की आदतों का अनुमान लगाया जा सकता था। हंसमुख से डॉक्टर हाथी हर बात कोसही बात हैठहरा देते थे और चिढ़ जाने पर पोपटलाल कोधत बुड़बककहने में भी देरी नही लगiते थे। 

बिहार के सासाराम जिले में पैदा हुए और पलेबढ़े कवि कुमार आज़ाद ने अपना बचपन बहुत मुफ़लिसी में बिताया। 1996 में तंगहाली से घिरे हुए आज़ाद बिहार से निकलकर जब बम्बई पहुंचे तो धीरे धीरे उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी पकड़ बनाई।  “तारक मेहता का उल्टा चश्मामें आने से पहले उन्होंने कुछ हिंदी फिल्मों में भी काम किया।मेलाऔरफंटूशमें उन्होंने छोटे मगर प्रभावी क़िरदार निभाए। फिरतारक मेहता का उल्टा चश्मामिलने के बाद उन्होंने डॉक्टर हंसराज हाथी का क़िरदार सार्थक कर दिया। घर घर लोग उन्हें पहचानने लगे। 

सबकुछ इतना बढ़िया चल ही रहा था, “तारक मेहता का उल्टा चश्माके 10 साल पुरे होने को थे और 2500 एपिसोड्स पूरे होने के उपलक्ष्य में एक बैठक में उन्हें शामिल होना था।ऐसे वो सेट पर हर रोज़ आते थे, तबियत ख़राब होने के बावजूद, शो से उन्हें बहुत प्यार था मगर उस दिन उन्होंने सुबह फ़ोन कर अपने शो प्रोड्यूसर को बताया कि उनकी तबियत ठीक नहीं है और वो नहीं रहे हैं। तभी अचानक दोपहर को खबर आई कि डॉक्टर हाथी दुनिया को अलविदा कह चले थे। उनके जाने से पैदा हुआ वह शुन्य काफ़ी वक़्त तक हमें सालता रहेगा और उनकी कमी हमें खलती रहेगी  

अब जबकि वो चले गए हैं तब लग रहा है केदारनाथ सिंह जी ने सही ही कहा था, वाक़ईजानाहिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है।

उनके जाने पर पटनाबीट्स के हम सभी साथी यही कामना करते हैं कि डॉक्टर हाथी जहां भी हों वहां उनको शान्ति मिले.

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Quote of the day: “Nobody is exempt from the trials of life, but everyone can always find something positive in everything even in the worst of times.”
― Roy T. Bennett


 

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