पटना का ये संस्थान करा रहा है अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई

हम भारतीयों के लिए कोई नयी बात नहीं है की हम बेहतर शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों की खातिर सात समुन्दर पार तक चले जाते हैं। क्यूंकि हमारे यहाँ अच्छी शिक्षा और अच्छे अवसर सिर्फ उन्ही को प्राप्त होते हैं जो या तो मेधावी होते हैं या फिर धनवान। जो इन दोनों में से एक नहीं होते वो भारत के शीर्ष कॉलेजों की लाइन में ही खड़े रह जाते हैं। एक औसत  भारतीय छात्र एक अच्छे  कॉलेज में बस अपने लिए जगह तलाशता रह जाता है।

यूँ तो उन बच्चों के माँ बाप बड़े गर्व के साथ कहते हैं की  उनके बच्चे विदेश में या किसी दूसरे शहर पढ़ रहे हैं पर वो इस बात से भी इनकार नहीं करते की उन्हें अपने बच्चों की कमी हर समय खलती है और वो कितना अकेला महसूस करते हैं। अपने ड्रीम करियर में एक समय वः भी आता है जब वो यह सोचते हैं की काश उनके अपने देश में पर्याप्त शिक्षा और रोजगार के अवसर होते तो उन्हें अपने देश को छोड़ कर जाना नहीं पड़ता। उनमे से कई उन लोगों से जलते हैं जो अपने गृह नगर में रहते हैं।

बेहतर करियर के लिए अपने घर को छोड़ कर अपने परिवार से दूर रहना कई बार मजबूरी भी होती है क्यूंकि उनके पास दूसरा विकल्प नहीं होता। ऐसा ही कुछ अजय प्रसाद और सहर्ष भूषण के साथ भी हुआ था। अजय और सहर्ष यूँ तो दो अलग अलग पीढ़ियों से थे पर उनके हालात एक ही जैसे थे, वे दोनों अपने घर को छोड़ कर पढने गए थे और जानते थे की वो शायद कभी वापस नहीं लौट पाएंगे।

 

पटना साइंस कॉलेज के छात्र रह चुके अजय ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ जॉर्जिया से एमबीए किया था और तब से वो युएसए में ही रह रहे थे। कई अंतराष्ट्रीय कंपनियों में अलग अलग पदों पर काम करने के बाद अजय ने उन्होंने अपनी उधमी यात्रा एक कैलिफ़ोर्निया की कंपनी ग्लोबल मार्केटिंग रिसोर्सेज़ के साथ शुरू की जो एक ऑनलाइन ट्रांसक्रिप्शन सर्विसेज पोर्टल है। GMR आज एक बड़ा ब्रांड है और अजय एक सीरियल इंटरप्रेनुर है और कई डिजिटल उपक्रमों में अपने आइडियाज दिए हैं।

सहर्ष अपना घर छोड़ कर २००६ में बंगलोर इंजीनियरिंग पढने गए थे और उसके बाद  क्राइस्ट यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडल के साथ एमबीए किया। उसके बाद उन्होंने FMCD इंडस्ट्री की एक उच्चतम ब्रांड के साथ काम करने लगे। बिहार के ये दोनों लाल जो एक दूसरे से हजारो मील दूर थे, पहली बार कोलकाता में मिले और वहीँ इन दोनों ने फैसला किया की दोनों मिल कर बिहार और भारत में विश्वव्यापी अवसर उपलब्ध कराएँगे।

डिजिटल मार्केटिंग एक उभरता हुआ क्षेत्र है और हर साल  ग्लोबल मार्केटिंग बजट का अच्छा  खासा हिस्सा इस पर खर्च होता है और आने वाले समय में यह और बढ़ने वाला है। शोध  कहते हैं २०२० तक दुनिया भर में ३।५ लाख से ज्यादा डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञों की जरुरत पड़ेगी जिसमे से १।५ को भारत में नियुक्त किया जा सकता है। इसमें से साठ प्रतिशत नौकरियां यूएसए से निकलेंगी। इस तरह ज्यादातर डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञों को आसानी से अमेरिकी कंपनियों में उच्च वेतन वाली नौकरी मिल सकती है और वो अपने मनचाहे लोकेशन से काम कर सकते है।

 

“कई ऐसे छात्र हैं जो ३-४ साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगा देते हैं और उनमे से कुछ ही हैं जो सफल हो पाते हैं। बाकि अगली परीक्षा का इंतज़ार करते रह जाते हैं, ये बहुत ही दुखदायी है। डिजिटल मार्केटिंग में भारी मांग है पर हमारे ज्यादातर भारतीय बच्चे भेडचाल का  हिस्सा बन कर अपने कीमती साल बर्बाद करते हैं” अजय कहते हैं।

१३ साल तक गृहिणी का जीवन बिताने वाली और दो खूबसूरत बच्चों की माँ मेघा वर्मा ने DMIOA के पहले बैच में काफी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वो कहती हैं की DMIOA “DMIOA पढाई के साथ साथ व्यावहारिक ज्ञान भी देता है। यहाँ की पाठन सामग्री भी काफी अच्छी और समझने में आसान है। यहाँ का वातावरण काफी मित्रतापूर्ण है। शिक्षक काफी मदद और उत्साहवर्धन करते हैं।

“यहाँ मैंने जो कुछ भी सीखा है वो अमूल्य है और मैं नयी चुनौतियों और सफलताओं के लिए तैयार हूँ” मेघा को पहले ही एक अमेरिकी कंपनी में एक तगड़ी इंटर्नशिप मिल चुकी है  जल्दी ही एक फुल टाइम नौकरी में तब्दील होने वाली है।

DMIOA की एक दूसरी छात्रा कृतिका मस्कारा जो एक बिजनेस स्कूल से MBA कर रही है कहती हैं-“ मैं MBA कर रही हूँ और MBA के साथ साथ डिजिटल मार्केटिंग करन मेरे प्रोफाइल और मार्केटिंग की मेरी समझ  को बढ़ाएगा। आज दुनिया भर के लोग और ज्यादा सोशल हो रहे हैं और वो हर जानकारी की इन्टरनेट के माध्यम से प्राप्त करना चाहते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में एक आम नौकरी से ज्यादा डिजिटल दुनिया की नौकरी ज्यादा लाभकारी होगी। और इसके लिए DMIOAबिलकुल सम्पूर्ण जगह है। यहाँ पर आप डिजिटल मार्केटिंग के हर सिद्धांत को अछि तरह समझ सकते हैं” बाकियों की तरह कृतिका भी इंटर्नशिप कर रही है और अपने फाइनल प्लेसमेंट का इंतज़ार कर रही है।

डिजिटल मार्केटिंग इंस्टिट्यूट ऑफ अमेरिका GMR और भूषण एडुकोर्प प्राइवेट लिमिटेड का एक संयुक्त प्रयास है जो डिजिटल मार्केटिंग के ज्ञान देकर युवाओं को अपने लिए बेहतर करियर पाने  का अवसर प्रदान करता है। ये भारत में पहली बार एक ऐसा पाठ्क्रम लेकर आई है पूरी तरह से उद्योग पर आधारित है और इसे यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया – मिरामर ने डिजाईन किया था। यह अमेरिकी कोम्पनियीं के साथ इंटर्नशिप की सौ प्रतिशत गारंटी देता है।। DMIOA के पहले बैच में २ गृहणियां, MBA के छात्र और कामकाजी लोग है जो दिसम्बर में ग्रेजुएट हो जाएँगे और उनके पास पहले से ही कई जॉब ऑफर हैं।

 

जैसे जैसे भारत डिजिटल होता जाएगा डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट्स की जरुरत बढती जाएगी। डिजिटल मार्केटिंग युवाओं को अपने प्रियजनों के पास रह कर सही करियर चुनने में और अच्छी  नौकरियां हासिल करने में मदद करेगी।

आप DMIOA की  यहाँ से डिजिटल मार्केटिंग कोर्सेज की जानकारी ले सकते हैं : http://www.dmioa.com/

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Quote of the day:““How we spend our days is, of course, how we spend our lives.” 
― Annie Dillard, The Writing Life

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