अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को सुनिए ये भोजपुरी गाना

आज अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जा रहा है। 2000 से हर साल की 21 फरवरी को विश्वव्यापी तौर पर मनाया जाने वाला ये दिवस हर भाषा के महत्त्व और  बहुसंस्कृतिवाद के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता ...
माँ, माटी और माइग्रेशन

प्रवासी बिहारियों के दिल की पुकार : माँ, माटी और माइग्रेशन

हाल के दिनों में बिहारी भाषाओँ, ख़ास तौर पर भोजपुरी में साफ़ सुथरे और अच्छे स्तर के गानों एवं शॉर्ट फिल्मों की नयी खेप आने लगी है। इन सारे कंटेंट को इंटरनेट और सोशल मीडिया एक बड़ा और सर्वव्यापी प्लेटफार्म प्रदान क...

इस बार छठ छूट न पाए | अपनी परंपरा बचाये रखने की सीख देता ये वीडियो “कबहू ना छूटी छठ”

दिवाली की रात के बाद की ही सुबह से हवाओं में हल्की ठण्ड के साथ छठ की आहट आने लगती है। चारो ओर की चहल पहल इस महापर्व के नज़दीक आने का इशारा करने लगती है। लोगों में तो उत्साह और हर्षोल्लास की लहर होती ही है इसके स...

दुइ मुट्ठी : सात समुन्दर पार से आयी भोजपुरी की एक मीठी आवाज़

"गिरमिटिया", ये नाम बिहार के इतिहास के उन दर्दनाक पन्नो में दफन है जिन्हे आज भुलाया जा चुका है। ये नाम उन मजदूरों को दिया गया था जिन्हे सत्रहवीं शताब्दी में भारत आये अंग्रेज़ गुलाम बना कर  हज़ारो हज़ार की संख्या म...
अनारकली ऑफ़ आरा

Anaarkali of Aarah: नारी शक्ति का तांडव | एक फिल्म समीक्षा

"अनारकली ऑफ़ आरा", इस फिल्म का इंतज़ार तब से ही था जब से इसका नाम पहली बार सुना था और इस लंबे इंतज़ार के बाद इस फिल्म को देख कर वैसी ही संतुष्टि हुई जैसी कि गर्मी से अकुलाई धरती पहली बारिश के बाद महसूस करती होगी। ...
Pnkaj Tripathi, anaarkali of aarah, पंकज त्रिपाठी, अनारकली ऑफ़ आरा

“हम बिहारियों के DNA में जुझारूपन होता है” : पंकज त्रिपाठी

 आनेवाली फिल्म, अनारकली ऑफ़ आरा के सिलसिले में इस फिल्म के रंगीला यानि पंकज त्रिपाठी से बात करने का मौका मिला। हिंदी सिनेमा में अपनी खास और महत्वपूर्ण पहचान बना चुके पंकज त्रिपाठी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ...
भोजपुरी, bhojpuri, PatnaBeats

भोजपुरी सिनेमा निराशाजनक वर्तमान से आशान्वित भविष्य की ओर

This article has been written by Nitin Neera Chandra "भोजपुरी फिल्म" । ये दो शब्द एक ऐसा वाक्य बना देते हैं जिसके बारे में लोग अलग अलग राय रखते हैं । अमूमन एक भाव सबके अंदर आता है । "अश्लील" या "फूहड़" । मैं उ...
अविनाश दास

मोहल्ला से मुम्बई तक । जानिए अविनाश दास और उनके सफर की कहानी, उन्ही की ज़ुबानी

अब तक पेशे से पत्रकार रहे अविनाश दास अब "अनारकली ऑफ़ आरा" के जरिये अपनी दूसरी पारी फिल्म निर्देशक के रूप में शुरू करने जा रहे हैं। इनकी शाखाएं भले ही मायानगरी मुम्बई  पहुँच चुकी है लेकिन इनकी जड़ें बिहार में ही ह...