दुःख तेरे देश इतने निंदिया न आये रे | एक कविता बिहार से

यह सच है, बॉलीवुड का एक युग संगीतकारों और गीतकारों के नाम रहा है| यह भी उतना ही सच है कि नये युग के गीत की तुलना हमेशा पुराने युग से की जाती रही है| नये कलमकारों में बहुत कम ऐसे हैं जिनकी कलम में प्राकृतिक निकट...
एक कविता बिहार से

मेरा जन्म बिहार में हुआ | एक कविता बिहार से

  कहते हैं न एक खास व्यक्ति हमेशा ही आम दिखता है, जीता है | ऐसे ही थे भारत के ‘रत्न’ डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम. ‘मिसाइल मैन’, ‘जनता के राष्ट्रपति’, ‘मार्गदर्शक’, छात्र के शिक्षक और न कितने नामों से हर दिल...
कलीम आजिज़

तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो | एक कविता बिहार से

कहते हैं, "दिल से जो बात निकली ग़ज़ल हो गयी"। सही मायने में ये वो कलमकार थे जिन्होंने दिल की बात कही और कुछ ऐसे कही कि हर पढ़ने वाले के दिल तक पहुँचे।  कलीम आजिज़ उर्फ़ कलीम अहमद का जन्म 11 अक्टूबर 1924 को तेलहाड़...
राम, दशहरा

नाम पुछई छै राम कहै छै अबध के राजकुमार छै | एक कविता बिहार से

हर बुराई का नाश होना सुनिश्चित है ताकि अच्छाई की जय-जयकार हो सके| इसी धारणा को सम्पूर्ण करती है भगवान् राम की रावण पर मिली जीत| इस जीत की ख़ुशी में दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है| रावण का दहन किया जाता है तथा प्...
दुर्गा पूजा

हे अम्बिके, सुनु प्रार्थना, जगदम्बिके, सुनु प्रार्थना | एक कविता बिहार से

दुर्गा पूजा के शुभ मौके पर माँ दुर्गा की प्रार्थना में एक कविता प्रस्तुत है| कविता की भाषा मैथिलि है तथा कवि हैं पंडित श्री भोला झा ‘विमल’ जी| ‘विमल’ जी बिहार के मधुबनी जिला के चिकना नामक ग्राम से हैं| संस्कृत ...
मैं भूल जाता हूँ | एक कविता बिहार से

मैं भूल जाता हूँ | एक कविता बिहार से

गढ़ दी गयी कविताएँ स्त्री के भूगोल पर, चर्चाएँ आँख, कमर वक्ष पर खूब की गयी| स्त्री का इतिहास भी अछूता नहीं रहा, देवी से लेकर दास तक की गाथा खूब लिखी गयी| मनोविज्ञान भी स्त्री का खूब समझा गया, त्याग, करु...
ढोलकिया

किनका दुःख तलाश रहा है ढोलकिया | एक कविता बिहार से

शाहंशाह आलम जी यूँ तो बिहार विधान परिषद् में नौकरी करते हैं, लेकिन कविताओं और कविताओं से समबन्धित हर क्रियाकलाप में रुचि रखते हैं| इनकी विभिन्न किताबों पर दी गयी टिपण्णी (समीक्षा) भी काफी पसंद की जाती है| अक्सर...
बापू

जे भूल गइल बापू के उनका खातिर घुप्प अन्हरिया बा | एक कविता बिहार से

2 अक्टूबर है आज, भारत का एक और राष्ट्रीय पर्व, जो मनाया जाता है बापू के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में| आज देश के दूसरे तथा सफलतम प्रधानमंत्रियों में से एक श्री लाल बहादूर शास्त्री जी का भी जन्मदिवस है| पटनाबीट्स इन ...

मनवा में बसल ई बिहार कहाँ जाई | एक कविता बिहार से

महीने की आख़िरी कविता तक का सफ़र तय कर चुके हैं हम और नियम के अनुसार आज की कविता नेहा नूपुर की तरफ से होगी| पटनाबीट्स के एक कविता बिहार से में इनकी पुस्तक ‘जीवन के नूपुर’ से एक भोजपुरी कविता आज आपके सामने प्रस्तु...
बावला मन

उड़ने दो उसे पंख फैला के | एक कविता बिहार से

अभिषेक पाण्डेय, पेशे से इंजीनियर हैं| पटना के मूल निवासी हैं और फ़िलहाल नौकरी के सिलसिले में कलकत्ता में हैं| इनका युवा मन अक्सर तन्हाई में अपने आप से बातें करता है और जब बातें पन्ने पर उतरने को आतुर हो जाती ह...
मुझे मेरी यादों ने सींचा है

मुझे मेरी यादों ने सींचा है | एक कविता बिहार से

राजू महतो जी दिल्ली में एक मोशन ग्राफ़िक डिज़ाइनर हैं| बिहार के नवादा में घर है और घर से दूर रहते हुए अक्सर घर और आस-पास के माहौल को याद करते हैं| छोटी-छोटी बातें जब दिल को छूने लगती हैं तो इंसान कलमकार हो ही जात...
रामधारी सिंह दिनकर

कविता भक्ति की लिखूँ या श्रृंगार की | एक कविता बिहार से

भारत के राष्ट्रकवि होने का दर्ज़ा जिन्हें प्राप्त है, अर्थात् श्री रामधारी सिंह दिनकर जी का जन्मदिन 23 सितम्बर को है| 1908 ई० में जन्में श्री दिनकर को याद करते हुए पटनाबीट्स की एक कविता बिहार से में आज शामिल हो ...
चंदू , चंद्रशेखर, Chandu, Chandrashkekhar JNu

चंद्रशेखर तुम होते तो हम साथ-साथ उम्र जी लेते | एक कविता बिहार से

डर लगता है जब कोई दिवार लांघने की कोशिश करता है| डर लगता है जब कोई सच कहने की कोशिश करता है| डर लगता है जब किसी के विचार एक बाहुबली से टकराते हैं| डर लगता है जब कोई चंदू बनने की राह पर होता है| कन्हैया और रोहित...
दुनिया ऐसी हुआ करती थी , एक कविता बिहार से

दुनिया ऐसी हुआ करती थी | एक कविता बिहार से

“ओ माँ! ये दुनिया तेरे आँचल से छोटी है|”   ये पंक्तियाँ हैं नीलोत्पल मृणाल जी की, जिनकी पहचान एक उपन्यासकार के रूप में स्थापित हो रही है| अप्रेल 2015 में प्रकाशित इनकी पहली ही पुस्तक ‘डार्क हॉर्स’ के...
बचपन , एक कविता बिहार से

बचपन के दिन भले थे कितने | एक कविता बिहार से

रविन्द्र प्रसाद जी ने पटनाबीट्स से अपनी एक कविता साझा की है| कविता का शीर्षक हम सबको प्रिय है| इंसान कितना भी आगे निकल जाये एक जो चीज़ हमेशा उसे अपनी ओर खींचती है वो है ‘बचपन’| ये शायद ऐसी उम्र है जो जीवन भर साथ...