बालिका शिक्षा और रक्तदान का संदेश फैलाती भोजपुरी शार्ट फ़िल्म ‘दान’

अक्सर ऐसा होता है कि ज़िन्दगी में कुछ ऐसे छोटे छोटे अनुभव होते हैं जो आपको अंदर तक छू जाते हैं। इन अनुभवों का प्रभाव ऐसा होता है कि आप और आपकी सोच मूल रूप से हमेशा के लिए बदल जाती है। एक ऐसा ही अनुभव है राजू उपाध्याय की ये भोजपुरी शार्ट फ़िल्म ‘दान’

बुल्ला टॉकीज के बैनर तले बनी इस शार्ट फ़िल्म के अभिनेता और निर्देशक हैं राजू उपाध्याय। यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म की खासियत यही है कि हमें मौका मिलता है इस तरह के टैलेंट से रूबरू होने का। राजू को इस से पहले आपने “कोहबर” और “धिया-पूत” जैसी शार्ट फिल्मों में देखा होगा। अगर नहीं देखा है तो जल्दी से जल्दी देख लीजिए। इन सारे शार्ट फिल्म्स में राजू ने अपने अभिनय से काफी प्रभावित किया है। इनके सरल और प्यारे किरदारों से मोहब्बत सी हो जाती है और ठीक यही चीज़ “दान” में भी देखने को मिली है। ब्रिज भूषण चौबे की लिखी इस शार्ट फ़िल्म में राजू उपाध्याय के साथ विधि पथिक और संतोष पथिक हैं।


Also See: This Bhojpuri Short Film Is Challenging Gender Roles


अगर शार्ट फ़िल्म के बारे में बात की जाए तो ये एक प्यारी और काफी असरदार कहानी है। एक गांव के मनमोहक परिवेश में रची बसी ये फ़िल्म देखने मे जितनी ख़ूबसूरत है उतना ही ख़ूबसूरत संदेश भी बड़ी सरलता से दे जाती है। मानो ऐसा लगता है जैसे किसी मासूम से बच्चे ने अपनी मासूमियत में बहुत ही बड़ी बात कह दी हो। ऐसे परिवेश में जब कि समाज में लड़कियों पे कई पाबंदियां अब भी लगी हुई हैं और जब इंसान का इंसान से सद्भाव कम होता दिख रहा है वैसे में ये भोजपुरी शार्ट फ़िल्म हमें रक्तदान कर अपनी इंसानियत को बरकरार रखने की और लड़कियों की शिक्षा से ज़रा भी समझौता ना करने की मूलभूत शिक्षा देती है। इस फ़िल्म के बारे में विशेष जानकारी इस फ़िल्म के बनाने वालों के ही हवाले से पढ़िए:

दान” रउआ सब के सोझा बा , दान कइला से मन के शांति मिलेला, रउरा सभे एक हाली अपना समरथ अनुसार दान कर के देखीं, सही में मन आनंदित हो जाला ।

आज के युग में “बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ” के नारा बा सगरो गूंज रहल बा, अइसे में एगो बाप, मंदिर के दान पात्र में दस रूपया दान स्वरूप देला के बजाय अपना बेटी ला उ रूपया से स्लेट कीन के ले आवे त सोचीं ओकरा आत्मा के केतना संतुष्टि मिली , ओपर से अपना आत्मा के आनंदित करे ला, मन के तृप्त करे ला अपना समरथ के हिसाब से, दोसरा के जीवनदायी हो जाये, ये कारण रक्त दान कर रहल बा , काहे कि उ जान रहल बा… रक्त दान , महादान ह ।

समस्त भोजपुरिया समाज से कर जोड़ के विनती बा कि एह लघु सिनेमा के आपन स्नेह दिहीं, खुद देखीं आ सबके देखाईं “दान”

~ ‘दान’ शार्ट फ़िल्म के यूट्यूब विवरण से

इस तरह के काम का भोजपुरी भाषा में होना वाक़ई दिल को बड़ा सुकून देता है और मन में ये उम्मीद जगाता है कि ये गौरवशाली भाषा सिर्फ अश्लीलता का शिकार हो के दम नहीं तोड़ेगी। बल्कि “दान” जैसे प्रयासों से इस भाषा को गंदा रूप देने वाले लोगों के खिलाफ प्रतिरोध का स्वर उठता रहेगा और आखिर में जीत अच्छे प्रयासों की ही होगी।

 

यहाँ देखिए भोजपुरी शार्ट फ़िल्म ‘दान’।

भोजपुरी शार्ट फ़िल्म ‘दान’

Do you like the article? Or have an interesting story to share? Please write to us at [email protected], or connect with us on Facebook and Twitter.


Quote of the day: “Knowledge, like air, is vital to life. Like air, no one should be denied it.” 
― Alan Moore, V for Vendetta

Comments

comments