माँ, माटी और माइग्रेशन

प्रवासी बिहारियों के दिल की पुकार : माँ, माटी और माइग्रेशन

हाल के दिनों में बिहारी भाषाओँ, ख़ास तौर पर भोजपुरी में साफ़ सुथरे और अच्छे स्तर के गानों एवं शॉर्ट फिल्मों की नयी खेप आने लगी है। इन सारे कंटेंट को इंटरनेट और सोशल मीडिया एक बड़ा और सर्वव्यापी प्लेटफार्म प्रदान क...

हाँ सलमान खान, बिहार में भी लोग “ब्रो” बोलते हैं

डियर सलमान ख़ान, घबराइये नहीं, ये वो वाला डियर नहीं है जिसका शिकार आपने नहीं किया था। खैर, ये ओपन लेटर लिखने के पीछे का कारण है आपके "रियलिटी" शो 'बिग बॉस' की एक वायरल होती क्लिप जिसमे आप बिहार से कॉल करने व...
मंगलमुखी, Transgender, patnaBeats, Patna

किन्नरों की ज़िन्दगी के संघर्षों को दिखाता नाटक मंगलमुखी

किन्नर, इंसानों का तीसरा जेंडर। हिजड़ा, छक्का जैसे शब्दों से अपमानित किये जाने वाले हम आप जैसे सामान्य लोग। हम सभी ने कहीं न कहीं देखा है इनको, अधिकतर बार ट्रेनों में, सिग्नल पर माँगते हुए या रेड लाइट एरिया मे...

इस बार छठ छूट न पाए | अपनी परंपरा बचाये रखने की सीख देता ये वीडियो “कबहू ना छूटी छठ”

दिवाली की रात के बाद की ही सुबह से हवाओं में हल्की ठण्ड के साथ छठ की आहट आने लगती है। चारो ओर की चहल पहल इस महापर्व के नज़दीक आने का इशारा करने लगती है। लोगों में तो उत्साह और हर्षोल्लास की लहर होती ही है इसके स...
सौरव आनंद, Saurav Anand

न्यू यॉर्क में बैठे इस बिहारी की कलम से पटना की कहानियाँ

पटना में जन्में और पले बढ़े सौरव आनंद को भी करोड़ों बिहारियों की तरह उनका करियर उन्हें बिहार से, अपने घर से दूर परदेस ले गया। ज़िन्दगी में सफलता की चाह ने उनके घर से उनका फासला बढ़ाया और बढ़ते बढ़ते वो आज न्य...

दुइ मुट्ठी : सात समुन्दर पार से आयी भोजपुरी की एक मीठी आवाज़

"गिरमिटिया", ये नाम बिहार के इतिहास के उन दर्दनाक पन्नो में दफन है जिन्हे आज भुलाया जा चुका है। ये नाम उन मजदूरों को दिया गया था जिन्हे सत्रहवीं शताब्दी में भारत आये अंग्रेज़ गुलाम बना कर  हज़ारो हज़ार की संख्या म...
Pnkaj Tripathi, anaarkali of aarah, पंकज त्रिपाठी, अनारकली ऑफ़ आरा

“हम बिहारियों के DNA में जुझारूपन होता है” : पंकज त्रिपाठी

 आनेवाली फिल्म, अनारकली ऑफ़ आरा के सिलसिले में इस फिल्म के रंगीला यानि पंकज त्रिपाठी से बात करने का मौका मिला। हिंदी सिनेमा में अपनी खास और महत्वपूर्ण पहचान बना चुके पंकज त्रिपाठी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ...
अविनाश दास

मोहल्ला से मुम्बई तक । जानिए अविनाश दास और उनके सफर की कहानी, उन्ही की ज़ुबानी

अब तक पेशे से पत्रकार रहे अविनाश दास अब "अनारकली ऑफ़ आरा" के जरिये अपनी दूसरी पारी फिल्म निर्देशक के रूप में शुरू करने जा रहे हैं। इनकी शाखाएं भले ही मायानगरी मुम्बई  पहुँच चुकी है लेकिन इनकी जड़ें बिहार में ही ह...