नेहा नूपुर

तुम्हें मनकों से हार बनाना है | एक कविता बिहार से

‘एक कविता बिहार से’ के सफर की शुरुआत को दो महीने हो गये| इस सफ़र में आपका जो साथ मिला, सराहनीय रहा| जैसा कि हमने निर्णय लिया था, आखिरी पोस्ट मेरी, यानि आपके होस्ट की, अर्थात् नेहा नूपुर की होगी; उसी वादे को पू...
हम हैं बिहारी

हम जागे तो जाग उठा है सारा हिन्दुस्तान | एक कविता बिहार से

आलम खुर्शीद साहब, आरा से सम्बन्ध रखते हैं और उर्दू के बड़े शायरों में देश-विदेश में जाने जाये जाते हैं| शानदार गज़ल तो लिखते ही हैं, इनकी कई किताबें भी आ चुकी हैं| लेकिन इससे इतर यह कविता उन्होंने खास तौर से भे...
आज़ाद , एक कविता बिहार से

आज़ाद क्या हुए, बिलगाव में हैं उलझे | एक कविता बिहार से

खगड़िया, बिहार के निवासी कैलाश झा किंकर जी का जन्म 12 जनवरी 1962 को हुआ| ये सक्रिय कवि होने के साथ-साथ ‘कौशिकी’ नामक पत्रिका के संपादक भी हैं, कविता की 10 किताबें भी लिख चुके हैं| श्री कैलाश जी के द्वारा साझा की...
आवाज उठानी होगी

आवाज उठानी होगी | एक कविता बिहार से

अमित शाण्डिल्य जी नये युग के कवि हैं| समस्तीपुर के तिस्वारा ग्रामनिवासी अमित जी 25 मई 1991 को जन्मे| फ़िलहाल पटना में नौकरी करते हैं तथा दिन भर का हिसाब हर रात पन्ने पर उकेर देते हैं| इस युवा कवि ने देश के प्रत...
ऐ वतन याद है किसने तुझे आजाद किया , Bashshar Habibullah

ऐ वतन याद है किसने तुझे आजाद किया | एक कविता बिहार से

गया में जन्मे आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री जी का कार्यस्थल मुजफ्फरपुर बना। यहीं सरकारी संस्कृत कॉलेज में प्राध्यापक के पद पर इनकी स्थायी नियुक्ति थी। संस्कृत से साहित्य की दुनिया में कदम रख इन्होंने हिन्दी, अंग्...
सजग रहीहऽ

कोइला के बाढ़ भइल, सोना दहाता | एक कविता बिहार से

हीरा प्रसाद ठाकुर का जन्म बिहार के रोहतास जिले के नावाडीह ग्राम में 5 जनवरी 1948 को स्वतंत्र भारत में हुआ| राष्ट्रपति द्वारा ‘Literary Figure’, राज्य सरकार द्वारा ‘भिखारी ठाकुर सम्मान’ के साथ-साथ इन्हें कई साहि...
भाई-बहन

मैं भाई फूलों में भूला, मेरी बहन विनोद बनी | एक कविता बिहार से

रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ पेश है ‘एक कविता बिहार से’| 1911 में जन्में कवि गोपाल सिंह नेपाली जी बिहार के बेतिया जिले के निवासी थे| इनके गीत फ़िल्मी गानों में भी प्रयोग हुए हैं| ‘एक कविता बिहार से’...
झंडा की बोलै छै

झंडा की बोलै छै | एक कविता बिहार से

15 अगस्त को कितने प्रेम से झंडे फहराए जाते हैं, संकल्प लिए जाते हैं| लेकिन उसके बाद क्या? क्या हम उस संकल्प को पूरा करने की कोशिश करते हैं? क्या समझते हैं कि झंडा क्या कहना चाहता है? आज की कविता ‘अंगिका’ में ह...
उतान भइल रे

आनन्द सबका समान भइल रे | एक कविता बिहार से

किसी भी प्रान्त से हों हम, किसी भी भाषा में बाते करते हों, कुछ भी पहनते हों, किसी भी पेशे से जुड़े हों, दिल से हमसब हिंदुस्तानी हैं| कल 15 अगस्त है| हमारी आजादी का दिन| स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए हम झंडा फहराएँगे...
हमारा देश

यह जीवन क्या है? निर्झर है | एक कविता बिहार से

यह जीवन क्या है? निर्झर है, मस्ती ही इसका पानी है सुख-दुःख के दोनों तीरों से चल रहा राह मनमानी है| हर छोटे-बड़े मौके पर ‘जीवन’ का चित्र स्पष्ट दर्शाने हेतु इस्तेमाल की जानी वाली ये पंक्तियाँ क्या आपकी नज़र से भ...
जागो बीर जवान देश के

जागो बीर जवान देश के | एक कविता बिहार से

अंगिका, मैथिली की एक बोली के रूप में जानी जाई जाती है| हालाँकि इसका अपना अलग विस्तृत और समृद्ध साहित्य संसार है| पटनाबीट्स पर ‘एक कविता बिहार से’ के माध्यम से अब तक हम मैथिली, भोजपुरी, उर्दू और हिंदी की देशभक्त...
ध्वजा वंदना

दहक रही है आज भी | एक कविता बिहार से

पटनाबीट्स की ‘एक कविता बिहार से’ की कड़ियों में आप पढ़ रहे हैं देशभक्ति से ओत-प्रोत कवितायें, बिहार की भिन्न-भिन्न भाषाओं/बोलियों में| अब तक मैथिली, भोजपुरी और उर्दू की रचनाएँ आप पढ़ चुके हैं| इसी सिलसिले को आगे ब...
बटोहिया

सूतल अमर के जगावे रे बटोहिया | एक कविता बिहार से

30 अक्टूबर 1884 ई० को बिहार के छपरा जिला (दहियावां) में जन्में श्री रघुवीर नारायण जी की कविता बटोहिया के बारे में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने कहा था, “बाबु रघुवीर नारायण बिहार में राष्ट्रीयता के आदिचारण...
भारत माता

भारत माता | एक कविता बिहार से

15 अगस्त, भारत की आजादी का दिन है| क्यों न ये उत्सव पूरे महीने मनाया जाये| इस महीने बिहार के कविओं द्वारा रचित देशप्रेम से ओत-प्रोत कवितायें भी आती रहेंगी आपके सामने, वो भी बिहार के अलग-अलग क्षेत्रिय भाषाओं से ...
हर बार पहली बार सा है

हर बार पहली बार सा है | एक कविता बिहार से

“दुआएँ जीत जाती हैं उसकी, मेरा ग़म हर बार हार जाता है, वो एक शक्स उदासियों को इस कदर तार-तार करता है|” ‘एक कविता बिहार से’ को आज एक महीने हो गये, मतलब बिहार के कोने-कोने से, नई-पुरानी 15 कवितायें, 15 कड़ियों ...