अभिव्यक्ति के उत्सव, बिहार संवादी

अनंत विजय

चंद दिनों पहले बिहार के चंपारण की धरती पर सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह यात्रा के कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बहुत अहम बात कही। उन्होंने कहा कि ‘पिछले सौ बरस के दौरान तीन बहुl बड़ी कसौटियों के समय यही बिहार है जिसने देश को रास्ता दिखाया है। जब देश गुलामी की जंजीर में जकड़ा हुआ था तब बिहार ने मोहनलाल करमचंद गांधी को महात्मा बना दिया, बापू बना दिया, स्वतंत्रता के बाद जब करोड़ों किसानों के सामने भूमिहीनता का संकट आया तो बिनोबा जी ने भूदान आंदलोन शुरू किया था और तीसरी बात जब देश के लोकतंत्र पर संकट आया तो इसी धरती के नायक जयप्रकाश जी उठ खड़े हुए औपर लोकतंत्र को बचा लिया था।‘ अपने इस भाषण की क्लिपिंग को ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा- ‘जब दब देश के सामने संकट खड़ा हुआ है, बिहार ने देश को रास्ता दिखाया है।‘ प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को राजनीतिक टिप्पणी मानकर साहित्य जगत के लोग कमतर नहीं आंक सकते । उन्होंने बिहार की धरती से उठने वाले आंदोलनों और विमर्शों को रेखांकित किया। यह प्रवृत्ति सिर्फ राजनीति में नहीं है बल्कि साहित्य, संस्कृति, कला, और फिल्म में भी देखी जा सकती है। जब भाषा का सवाल पूरे देश को मथ रहा था तब रामधारी सिंह दिनकर ने संसद में साफ तौर पर खुले दिल से कहा था कि जैसे अन्य भारतीय भाषाएं चाहेंगी वैसे ही हिंदी को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए।साहित्य में भी ‘नकेनवाद’ समेत कई प्रवृत्तियां यहां की धरती से ही उठीं। अब जब एक बार फिर से साहित्य पर संक्ट की बात हो रही है, अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर पक्ष-विपक्ष में तल्खी दिखाई दे रही हैं और हिंदी के लेखकों को लिट फेस्ट्स में उचित प्रतिधिनित्व नहीं मिलने पर असंतोष जैसा व्याप्त हो रहा है तो बिहार की धरती से दैनिक जागरण एक नई शुरूआत करने जा रहा है। एक ऐसे साहित्य उत्सव ‘बिहार संवादी’ का आयोजन हो रहा है जिसमें स्थानीय प्रतिभाओं की तरजीह दी जाएगी। उनके विचारों को सुना जाएगा, उनकी कला को देखा जाएगा और 7 करोड़ से अधिक पाठक संख्यावाले समाचारपत्र के माध्यम से हिंदी जगत को इन प्रतिभाओं के बारे में बताया जाएगा। बिहारियों के अपने इस साहित्योत्सव का शुभारंभ बिहार के मुख्यमंत्री नीकीश कुमार करेंगे।

दैनिक जागरण की अपनी भाषा हिंदी को लेकर जारी मुहिम ‘हिंदी हैं हम’ के तहत 21-22 अप्रैल को पटना के तारामंडल में दो दिनों के अभिव्यक्ति के उत्सव बिहार संवादी के आयोजन के दौरान ‘दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर’ की चौथी सूची जारी होगी। ‘दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर’ की सूची की हिंदी जगत को बेहद उत्सकुता से प्रतीक्षा रहती है। ‘दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर’ की सूची के प्रकाशन के पहले हिंदी में बेस्टसेलर को लेकर कई तरह के भ्रम थे। इस माहौल में कोई भी लेखक अपनी कृति के बेस्टसेलर होने का दावा करता था और पाठकों के सामने सचाई नहीं आ पाती थी। अलग अलग तरह के दावों की वजह से भ्रम गहरा जाता था। ऐसे माहैल में भ्रम के जाले को साफ करने के लिए पिछले साल से दैनिक जगरण ने हिंदी बेस्टसेलर की सूची का प्रकाशन शुरू किया था। जिसका हिंदी साहित्य जगत में व्यापक स्वागत हुआ है। चौथी सूची के अलावा सालाना सूची भी जारी की जाएगी जिसमें हिंदी के पाठकों को उन लेखकों के बारे में बताया जाएगा कि सालभऱ में किस लेखक की पुस्तक सबसे अधिक बिकी। इसके अलावा ‘हिंदी हैं हम’ मुहिम के अंतर्गत एक और उपक्रम ‘दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति’ के सफल शोधार्थियों के के नामों की घोषणा भी ‘बिहार संवादी’ के दौरान की जाएगी। इस उपक्रम में गैर साहित्यक विषयों में हिंदी में मौलिक शोध करनेवाले शोधार्थियों को नौ महीने तक 75 हजार रुपए दिए जाएंगे।

इन दिनों साहित्य और सत्ता को लेकर काफी बातें होती हैं। लेखकों के बीच इस पर गंभीर मंथन जारी है कि सृजनधर्मियों के लिए विचारधारा आवश्यक है या नहीं। पक्ष विपक्ष में बहुत बातें हो रही हैं। इसके अलावा साहित्य में सत्ता के दखल को लेकर भी साहित्यकारों के एक वर्ग में चिंता दिखाई देती है वहीं दूसरा वर्ग इसको लेकर आश्वस्त दिखाई देता है। प्रेमचंद ने साहित्य को राजनीति के आगे चलनेवाली मशाल कहा था लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि आजादी के बाद खासतौर पर इमरजेंसी के बाद का जो काल है उसमें साहित्य को राजनीति के पीछे चलते साफ तौर पर देखा जा सकता है। साहित्य में सत्ता विमर्श को लेकर ‘बिहार संवादी’ के दौरान चर्चा होगी जिसमें बिहार के वरिष्ठ लेखक, कवि और चिंतक भाग लेंगे। प्रो रामबचन राय, अरुण कमल, आलोक धन्वा और प्रोफेसर रेवती रमण इस विषय पर बिहार संवादी में मंथन करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि इससे इस विमर्श को एक अंजाम तक पहुंचाया जा सकेगा। राष्ट्रवाद को लेकर भी तरह तरह की बातें हो रही है। राष्ट्रवाद की पश्चिमी अवधारणा और स्थानीय मत में साफ तौर पर द्वंद देखा जा सकता है। क्या राष्ट्रवाद नया समाज गढ़ रहा है? क्या इनके बीच परस्पर कोई संबंध हैं इसपर उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित और देश के मशहूर समाजशास्त्री प्रोफेसर एस एन चौधरी अपनी बात रखेंगे।

साहित्य में पिछले दिनों जिस प्रवृत्ति ने प्रमुखता से अपने को स्थापित किया उसमें स्त्री और दलित विमर्श अहम हैं। जाति के जांजाल में साहित्य पर ‘बिहार संवादी’ में जो विमर्श होगा उसमें कर्मेन्दु शिशिर, अनिल विभाकर, रमेश ऋतंभर जैसे दिग्गज शामिल होंगे और अपनी राय रखेंगे। बिहार की धरती से निकलकर पहले पत्रकारिता और फिर कॉरपोरेट जगत में शीर्ष पर पहुंचनेवाले उदय शंकर और वरिष्ठ संपादक अजीत अंजुम के बीच ब्राड बिहार से लेकर बिहारीपन पर बात होगी। मधेपुरा से मुंबई जाकर अपनी पहचान बनाने वाले गीतकार राजशेखर अपने फन का प्रदर्शन करेंगे।

पौराणिक धार्मिक कथाओं को लेकर इन दिनों खूब किताबें छप रही हैं। यह सिर्फ हिंदी में नहीं हो रहा है बल्कि अंग्रेजी के अलावा सभी भारतीय भाषाओं में पौराणिक चरित्रों और मिथकों को आधार बनाकर विपुल लेखन हो रहा है। इस लेखन में अलग अलग तरीके की व्याख्या देखी जा सकती है। अमीश त्रिपाठी जिस तरह से पौराणिक पात्रों को अपने उपन्यासों में उठाते हैं उससे ठीक उलट आनंद नीलकंठन की व्याख्या होती है। बिहार संवादी में साहित्य और धर्म के रिश्ते पर नरेन्द्र कोहली जी अपनी बात रखेंगे तो सीता को लेकर जारी अलग अलग मिथकों पर उषा किरण खान, आशा प्रभात और तरुण कुमार अपनी बात रखेंगे । साहित्यिक भूमि पर इन दिनों भाषा और बोली के बीच एक खास किस्म का वैमनस्य दिख रहा है लेकिन बोली के बिना भाषा का प्रदेश सूना होता दिखता है। इस पर भी बिहार की अलग अलग बोलियों के लोग मंथन करेंगे। फणीश्वर नाथ रेणु ने अपने लेखन से हिंदी कहानी को एक नई दिशा दी उसके बाद बिहार की कथाभूमि में क्या कोई बदलाव आया, क्या किसी कहानीकार ने रेणु से आगे जाकर उनके बनाए खांचे को तोड़ने की कोशिश की इस पर ह्रषिकेश सुलभ, अवधेश प्रीत, रामधारी सिंह दिवाकर और प्रेम भारद्वाज का संवाद होगा। सिनेमा के सक्ष में पंकज त्रिपाठी और संजय मिश्रा से विनोद अनुपम की बात होगी। बाहर मीडिया पर भी एक दिलचस्प सत्र होगा जिसमें देश के नामचीन संपादक हिस्सा लेंगे।  नए पुराने के फेर में हिंदी और साहित्य में प्रेम पर भी अलग अलग सत्र होंगे। दो दिनों तक चलनेवाले इस साहित्य उत्सव में अपनी परंपरा, अपनी विरासत और अपने गौरवशाली अतीत को भी सेलिब्रेट किया जाएगा ।

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