सीवान के पंजवार गांव में तीन दिसंबर को लगेगा भोजपुरी साहित्य और संस्कृति का जमावड़ा

हर साल सर्दियां शुरू होते ही साहित्य महोत्सवों का दौर शुरू हो जाता है। जयपुर लिट् फेस्ट, दिल्ली साहित्य महोत्सव और रेख़्ता जैसे बड़े साहित्यिक आयोजनों में देश भर से हज़ारों लोग जुटते हैं एवं साहित्य का जश्न मनाते हैं। इन सभी नामी-गिरामी साहित्यिक महोत्सवों के बीच एक ऐसा महोत्सव भी है जो की भोजपुरी भाषा उत्थान के लिए कार्यरत है। जी हाँ हम बात कर रहे हैं हिंदी इलाके के अनोखे देसज साहित्यिक-सांस्कृतिक महोत्सव आखर सम्मलेन की।

सीवान जिले के रघुनाथपुर प्रखंड में स्थित पंजवार गाँव में होने वाला ये वार्षिक साहित्य सम्मलेन देश-दुनिया के अलग-अलग कोने में बसने वाले भोजपुरीभाषियों के लिए किसी मेले से कम नहीं होता। प्रतिवर्ष देशरत्न राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर आयोजित होने वाले आखर सम्मलेन को भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मलेन का दर्जा प्राप्त है। 3 दिसंबर को होने वाले आखर सम्मलेन का इस बार नौवां आयोजन होगा जिसमे हर बार से अधिक भोजपुरी साहित्य, संस्कृति प्रेमियों के शामिल होने की संभावना है। हर वर्ष के आयोजन के साथ आखर सम्मलेन और समृद्ध होते जा रहा है।

आखर कल्चरल ट्रस्ट की शुरुआत कुछ भोजपुरीभाषी युवाओं ने सोशल मीडिया पर की थी। देश-दुनिया के अलग-अलग कोने में स्थित इन युवाओं ने भोजपुरी भाषा और संस्कृति उत्थान को लेकर संवाद की शुरुआत की जिसने आगे चलकर एक सांस्कृतिक मंच का रूप ले लिया। समय के साथ आखर तरक्की करता गया और प्रिंट और ई पत्रिका का भी प्रकाशन किया।

प्रतिवर्ष आखर सम्मलेन की शुरुआत गौरवयात्रा से होती है, जिसमे पंजवार गाँव एवं आसपास के इलाकों से आये हज़ारों छात्र-छात्राएं अपनी भाषा भोजपुरी के गौरव का उद्घोष एवं भाषा बचाने की अपील करते हैं। हर वर्ष गौरवयात्रा में छात्र-छात्राओं की बढ़ती हिस्सेदारी साफ़ तौर पर देखी जा सकती है।


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इस बार के आखर सम्मलेन में गौरवयात्रा के बाद विभिन्न आयोजन होंगे जिसमें सबसे पहले यात्रा में शामिल बच्चे अपनी प्रस्तुति देंगे और इसके बाद दीप प्रज्वलन के साथ सम्मलेन एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक सभा का शुभारम्भ होगा। पंजवार के प्रभाप्रकाश डिग्री कॉलेज के पास बने विशाल सभागार में ही सारे आयोजन होंगे। भोजपुरी के मशहूर कलाकार भरत सिंह भारती लिविंग लीजेंड के तौर पर उपस्थित रहेंगे एवं उन्हीं के द्वारा वार्षिक कैलेंडर का लोकार्पण होगा। आखर ने तीन वर्ष पहले वार्षिक भोजपुरिया कैलेंडर को प्रकाशित करने की शुरुआत की थी। इस कैलेंडर में 12 साहित्यिक एवं सांस्कृतिक लोगों को शामिल किया जाता है जिन्होंने अपने कला की बदौलत भोजपुरी के स्तम्भ को और मज़बूत करने में अहम् भूमिका निभायी है। इन 12 लोगों में 11 दिवंगत लोग होते हैं और हर साल एक लिविंग लीजेंड को शामिल किया जाता है। पहले और दूसरे वर्ष के कैलेंडर में क्रमशः शारदा सिन्हा एवं भरत शर्मा व्यास लिविंग लीजेंड की भूमिका में थे जबकि इस वर्ष भरत सिंह भारती को लिविंग लीजेंड के तौर पर शामिल किया गया है। बाकी के ग्यारह नाम जो वार्षिक कैलेंडर की शोभा बढ़ाएंगे, वो हैं-

उदय नारायण तिवारी

दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह ‘नाथ’

रसूल मियां (रसूल अंसारी)

मनोरंजन प्रसाद सिंह

पद्मश्री रामेश्वर सिंह ‘कश्यप’

रघुवंश नारायण सिंह

शिव प्रसाद ‘किरण’

गीतकार- शैलेन्द्र

मैनावती देवी “मैना”

बिजेंद्र अनिल

प्रभुनाथ सिंह

कैलेंडर लोकार्पण के बाद सेमिनार एवं टॉक शो का आयोजन किया जाएगा जिसमे प्रो वीरेंद्र नारायण यादव, डॉ जौहर शाफिआबादी, डॉ अर्जुन तिवारी, हृषिकेश सुलभ, ध्रुव गुप्त, डॉ मुन्ना पांडेय, गुरुचरण सिंह, जैसे साहित्यकार भाग लेंगे। युवा साहित्यकारों में रोहित सिंह, गरिमा रानी, आशुतोष पांडेय आदि महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सत्र के दूसरे चरण में डॉ सुभाषचंद्र यादव, ध्रुव गुप्त, व तंग इनायतपुरी जैसे मशहूर कवियों के साथ एक कवि सम्मलेन का आयोजन किया जाएगा। कवि सम्मलेन के साथ साहित्यिक सत्र समाप्त होगा एवं महाविद्यालय के बच्चों की प्रस्तुति होगी।

शाम छः बजे सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत होगी जिसमे एक मशहूर फिल्म हस्ती भी उपस्थित रहेंगे। इस सत्र में कुछ मशहूर नाट्य कलाकारों के द्वारा खूबसूरत प्रस्तुति होगी। एनएसडी से पढ़े राकेश कुमार ख़ास लौंडा नाच प्रस्तुत करेंगे। मशहूर नृत्य गुरु विपुल नायक अपनी टीम के साथ भोजपुरी गीतों एवं शास्त्रीय संगीत का अनोखा फ्यूज़न पेश करेंगे। इसके अलावा प्रख्यात गायिका सुश्री चन्दन तिवारी, युवा गायक शैलेन्द्र मिश्र की विशेष प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही और भी बहुत कुछ होगा जो आपको अपनी भाषा,अपनी संस्कृति की ओर खींच ले जाएगा। पटनाबीट्स की ये गुज़ारिश है कि भले हीं आप साहित्य प्रेमी ना भी हों फिर भी अपने क्षेत्र के इस स्वाभिमान सम्मलेन में शरीक होकर अपनी भाषा के गौरव का, अपनी संस्कृति का लुत्फ़ उठाएं एवं सभी आयोजकों और आखर समूह का हौसला बढ़ाएं।

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Quote of the day:“History doesn't repeat itself, but it does rhyme.”  
― Mark Twain

 

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